STORYMIRROR

DEVIKA VACHHANI

Drama

2  

DEVIKA VACHHANI

Drama

सफ़र मुसाफ़िर का

सफ़र मुसाफ़िर का

1 min
510

हर इंसान मुसाफ़िर होता है

कभी प्यार के लिए

कभी रिश्तों के लिए

कभी अपनों के लिए

कभी अपने लिए

आने वाले सफर से


अनजान डगमगाते हुए

कदमों के निशान

छोड़ता हुआ पीछे

दिल में एक आस लिए

कभी सूरज की रौशनी में

कभी चाँद की चांदनी में


कभी हँसते हुए

कभी रोते हुए

मुसाफ़िर

चलता ही रहता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama