STORYMIRROR

Pulkit Sharma

Abstract

3  

Pulkit Sharma

Abstract

नहीं होंगे कामयाब

नहीं होंगे कामयाब

1 min
200

नहीं होंगे कामयाब

नहीं होंगे कामयाब

नहीं होंगे कामयाब,किसी भी दिन

है नफरत चारो और,हिंसा चारो और

कैसे होंगे कामयाब किसी भी दिन।


होती है दरिंदगी

होती है दरिंदगी

होती है दरिंदगी,हर दिन

है डर चारो और,है भय चारो और

कैसे होंगे कामयाब किसी भी दिन।


सब प्यासे खून के

सब प्यासे खून के

जीवन ही नहीं है अब, नफरत के बिन

है दंगे चारो और,हिंसा चारो और

कैसे होंगे कामयाब किसी भी दिन।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract