नारी तेरी यही पहचान
नारी तेरी यही पहचान
नारी तेरा नारित्व ही
तेरी अब है पहचान
धरा पर तुझे भेजा प्रभु ने
तू बड़ी है महान,
तू ही दुर्गा तू ही पार्वती
तू ही काली तू ही सरस्वती,
तू ही है मोह तू ही है माया
तुझमें दिखे चण्डी की छाया ,
माया ममता की तू है मूरत
तुझमें दिखे पूरे ब्रम्हाण्ड की सूरत ,
तू है माँ तू है हमसफ़र
तू है बहन तू है दिलबर ,
तू है ताकत तू है हिम्मत
तू है संबल तू है जन्नत,
फिर क्यूँ ख़ुद को
कमज़ोर समझती हो
शक्ति को अपने क्यूँ
लाचार करती हो ,
एक सफल पुरुष के पीछे
तेरा ही योगदान होता है ,
लेती सारी ज़िम्मेदारियाँ सिर पर
तभी तो पुरुष उड़ान भरता है,
इन मर्दों से तू कम नहीं
तेरे जितना यहाँ किसीमे दम नहीं,
हर क्षेत्र में है तूने बाज़ी मारी
पहचान अपनी शक्ति
तू नहीं अब अबला नारी,
तुझमें धृढ़ता तुझमें वीरता
तू है दयावान
प्यार का अथांग सागर तू
करे सबका कल्याण ,
पिता,पुत्र और पति
सबके लिए तू मूल्यवान
नारी तेरा नारित्व ही
सबसे बड़ी पहचान,
तेरे बिना ये सृष्टि है अधूरी
तेरे बिना ये कायनात ना हो पूरी,
ये नारी अब तू जाग
अपनी ताकद को पहचान
तुझसे ही है ये धरती
तुझसे ही है आसमान।
