STORYMIRROR

Anuradha Tripathi

Inspirational

4  

Anuradha Tripathi

Inspirational

मुस्कुराहट ३

मुस्कुराहट ३

1 min
534

जिंदगी की दौड़ में हम कितने अकेले है

रूह का पता नहीं जिस्मो के मेले हैं

हर इंसा के चेहरे पर परेशानियों के रेले है

जान है एक पर कईं जिंदगियाँ के झमेले है


जाने कहाँ गुम हो गई वो चहरे की मुस्कुराहटें

वो बचपन की शरारतें वो जवानी की नादानी

जैसे किसी ने छिन ली हो सारे कायनात की कहानी


क्यूँ ना आज हम फिर एकवार कोशिश करें

डुंड लाएं उस संदुक को जिसमें कैद है वो मुस्कुराहटें

वो शरारतें वो मौजों की रवानी

खोल दे उस ताले को जिससेे फिर से रौनक हो ये जिंदगानी


ना फिर हो कोइ उदास ना हो कोई जवानी बेमानी

आओ मिल कर सब खोजें वो चेहरे की मुस्कुराहट रुहानी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational