STORYMIRROR

Dr. Anu Somayajula

Others

4  

Dr. Anu Somayajula

Others

मशीनी दौड़

मशीनी दौड़

1 min
327

आदमी भी अजीब है

फूला नहीं समाया

चौपाए से दोपाए हुआ जब

अपने दो पैरों की क्षमता पर

अचरज भी करता

गर्व भी


नहीं रहा जब एक

साथ दिया बैसाखी ने

चलता गया

कभी कभी लकड़ी का पांव लिए

चला न पाया जब

साइकिल, स्कूटर या मोटर

नए नए पुर्ज़े हैं जोड़ लिए


दो और दो का गणित जोड़कर

उगा लिए हैं चार पांव अब

अपने वाहन के

चलते जाते जो फर्राटे से

गलियों में, सड़कों पर

उड़ते कभी

कभी चीरते रेत की चादर को

और कभी तैरते लहरों के आंचल पर


दौड़ मशीनी होती रही

पांव निष्क्रिय होते गए

नियति के खेल में

दोपाए एक बार फिर चौपाए बनते गए।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन