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Ruchi Sinha

Abstract

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Ruchi Sinha

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मंज़िल

मंज़िल

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मंज़िल की तलाश में,

बढ़ चले हैं कदम,


जाना है किस ओर,

यह समझ सके ना हम !


ख़ैर ! रस्ते खुद बना लेंगे,

कोशिश कभी होगी ना कम,


आखरी सॉंस में ही सही,

पर मंज़िल तो पायेंगे हम।


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