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payal_13 sahu

Abstract

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payal_13 sahu

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मजबूर दिल

मजबूर दिल

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मजबूर है ये दिल 

एक तरफ रिश्ते की डोरी 

एक तरफ मंजिल 


कभी मंजिल की और 

कभी रिश्ते की खातिर 

भागना है मुश्किल 

मजबूर है ये दिल !


आसान नहीं ये जिंदगी जीना 

हर मुश्किल को गले लगाना 

कभी सुख का साथ 

कभी गम का साया 

और दुःख के घने बादल 

फिर भी मजबूर है ये दिल !


टूटे सपने उजड़ा अतीत 

 सब मिलकर लिखते हैं भबिष्य 

जो है अनदेखा पर अनमोल 


फिर भी हज़ारूं ख्वाइशों 

भर देते हैं आँचल 

क्यों की मजबूर है ये दिल !


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