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Shreyash Singh

Abstract

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Shreyash Singh

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माँ

माँ

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माँ दिन बाद बहुत आज बैठा हूं ,

लेकर वक़्त से कुछ समय उधार ,

सोच विचार बहुत किया ,की क्या लिखूं ,

क्या दूं इस कोरे कागज पर उतार ।


रचना करूंगा मैं प्रकृति पर ,

महानुभावों की भांति यह था ठाना ,

या लिख दूं उसके बारे में ,

जिसे दुनिया कहती है महाराणा ।


या करूं वरण बारे में दुनिया के अपने ,

ख्याल आया फिर यह भी एक ।

स्मरण हुआ की रेे माँ तूही तो दुनिया है अपनी ,

तेरे आगे क्या है अच्छा , कौन है तुझसे ज्यादा नेक ।


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