माँ
माँ
सबके मन की सुनती है वो
सबके दिल की समझती है वो
सबकी आशायें पूरी करती
सबके दिल को खुश है रखती
खुद के मन की सुन न पाती
खुद के दिल को भुलाती जाती
खुद की आशायें छिपाती है वो
खुद के दिल को
जाने कब खुश रखती वो
अपने लोगों में खो सी जाती वो
खुदके दिल में जाने कब उतरती वो
सबका एक आँसू भी सह न पाती वो
जाने खुद के आँखों का
सागर कैसे सम्भालती वो
मेरा दिल समझता उसको
मेरा दिल पूजता उसको
माँ है वो मेरी
दिल मेरा भगवान
कहता उसको।
