STORYMIRROR

Nitisha Chourasia

Abstract

3  

Nitisha Chourasia

Abstract

माँ

माँ

1 min
296

सबके मन की सुनती है वो 

सबके दिल की समझती है वो 

सबकी आशायें पूरी करती 

सबके दिल को खुश है रखती 


खुद के मन की सुन न पाती 

खुद के दिल को भुलाती जाती 

खुद की आशायें छिपाती है वो 

खुद के दिल को

जाने कब खुश रखती वो 


अपने लोगों में खो सी जाती वो 

खुदके दिल में जाने कब उतरती वो 

सबका एक आँसू भी सह न पाती वो 

जाने खुद के आँखों का

सागर कैसे सम्भालती वो 


मेरा दिल समझता उसको 

मेरा दिल पूजता उसको 


माँ है वो मेरी 

दिल मेरा भगवान

कहता उसको। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nitisha Chourasia

माँ

माँ

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract