STORYMIRROR

Amita Paithankar

Abstract

2  

Amita Paithankar

Abstract

लम्हों की तितलियाँ

लम्हों की तितलियाँ

1 min
309

ओस की वो बूंद नन्हीं सी

पलकों पे आके ऐसे रुकी 

जैसे रूह हो मेरी कविता की

छलकने का नाम ही नहीं !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract