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kh pathak

Abstract

4.0  

kh pathak

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कोरोना से क्यों रोना

कोरोना से क्यों रोना

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कोरोना से क्यों रोना

कोरोना से डरो ना

थोड़ा तो घर में रहो ना

इसे मत छोड़ो ना

प्यार से समझाया है


वक्त की गहरायी को समझो ना

बस थोड़ा बात मान लो ना

इसमें कोई नुकसान नहीं तुम्हारा

इतना भरोसा करोना


घर के बाहर मत निकलो ना

बस इतनी बात मान लोना

सबके साथ कुछ समय बिता लोना

इस महामारी के खत्म होने तक


इतनी समझदारी दिखा दोना

कुछ तो देश के बारे में सोचोना

घरों में सुरक्षित रहोना

सबको ये कहोना

किस बात का है डर


और क्या है तुम्हे फिक्र

बाहर के लोगो से संपर्क करोना

कुछ दिन नियमो का पालन करोना

माना बाहर की याद सताती है


पर हँसते हँसते थोड़ा गम सह लोना

फिर तो जीत तुम्हारी ही होगी कोरोना से क्यों रोना।


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