STORYMIRROR

Aradhana Kanchan Saxena

Abstract

4  

Aradhana Kanchan Saxena

Abstract

खुशी मेरी अधूरी है

खुशी मेरी अधूरी है

1 min
252

खुशी मेरी अधूरी है

तेरा साथ बहुत ज़रूरी है

सिर्फ साथ खड़े हो के नहीं

तेरा मन भी होना ज़रूरी है

मेरा भी मन करता है

कुछ बातें हो जो ना हुई पूरी हैं


खुशी मेरी अधूरी है

तेरा साथ बहुत ज़रूरी है


कुछ मैं कहूं कुछ तू सुने

प्यार के कुछ स्वेटर बुनें

मुझमें सब बुरी बातें ही नहीं

कुछ तारीफ भी किया कर

जो बातें मुझमें अनूठी हैं


खुशी मेरी अधूरी है

तेरा साथ बहुत ज़रूरी है

कभी मैं तुझे याद आऊं

ख्यालों में तुझको तड़पाऊं

कभी तो दूर हो के भी पास हों

ऐसी नजदीकियां भी तो ज़रूरी हैं

पास हो के भी क्यूं ऐसा लगता है


खुशी मेरी अधूरी है

तेरा साथ बहुत ज़रूरी है


तू क्यों पराया सा लगता है

मैने तो ये दुनिया ही समेट ली

दुनिया के नाम पर तेरे आगे पीछे ही घूम ली

पर मेरा भी तो कुछ वजूद है

ये बात तेरा समझना भी तो ज़रूरी है


खुशी मेरी अधूरी है

तेरा साथ बहुत ज़रूरी है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract