खत !!
खत !!
चाहती हूँ एक खत लिखूँ तुझे
जो दिल में हैं सब लिख दूँ उसमे
पर अकसर एक सवाल मन में रह जाता है
क्या कोई ऐसा है इस जहान में
जो उस खत को तुम तक पहुँचा पाता है
चाहती हूँ तुम्हे बताऊँ मेरे
साथ क्या क्या हो रहा है
तुम्हे दिखा पाऊँ ये दिल तेरे
बिना कितना रो रहा है
तुम्से बिछड़े हुए आज
कईं साल हो गए मुझे
फिर भी आँखें आज देखने
के लिए तरस गई है तुझे
चलो तो ऐसा करती हूँ
एक वादा करती हूँ
तुमसे और खुदसे
कि खत पहुँचे या ना पहुँचे
मैं हमेशा लिखती रहूँगी दिल से
एक वो दिन तो आएगा
जब मैं मिलूँगी तुझसे तेरे ही जहान में
और तू कहेगी
बेटा सब कुछ पढ़ा है मैंने, जो भी कुछ
लिखा है तुमने वहाँ पे !
