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Nikita S Byali

Abstract

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Nikita S Byali

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कभी ना छूटना.!

कभी ना छूटना.!

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न जाने किस पुण्य से तुम मिल गए

पर ज़िन्दगी भर के लिए मेरे साथ थम गए

खुदा न खस्ता तुझे कुछ हो न जाये

लम्हे तेरी मेरे यादों से मिट न जाये


जाने किस पल तुमसे मैं मिल पाऊँ

यादें बिन तेरे एक पल भी ना रह पाऊँ

तेरे बिन दिन लगता है सूखा-सूखा

तू न दे अपनी जीजी को धोखा

आदत सी बन गयी है मुझे तेरी

मुस्कराहट आ जाये जब बातें याद करूं मैं तेरी


वक्त के साथ इंसान बदलता है ज़रूर

पर तू तो है मेरा गुरूर

गुस्से से कुछ बोल देती हूँ अचानक से

पर डर भी जाती हूँ कहीं खो न दूं तुम्हे भयानक से


प्रेमियों की भाँति आसमान में तू मुझे कभी न दिखा 

पर दिल में मेरे कभी न रूठा दिखा

न जाने तू कितने झूट बोलते रहा

न जाने मुझसे कितने सच छुपाते रहा


हमारा रिश्ता कोई जाने या ना जाने

हम जो है वो भगवन जाने

घबरा मत तेरी दी है हर पर तेरे साथ

कभी ना हटाऊं तेरे सर पर से मेरा हाथ

तुम हो तो मेरे छोटे भाई

पर हर समस्या मे देते हो ज़बरदस्त राय! 



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