STORYMIRROR

सूक्ष्म महाजन

Inspirational

4  

सूक्ष्म महाजन

Inspirational

जलन

जलन

1 min
57

जलन एक विष बेल है, कर देती सब स्वाह   

 भस्म करे रिश्ते सभी, मन में हो जो डाह।   

   

आज हैं कल रहे नहीं, समय बड़ा अनमोल   

बीता समय न लौटता, नहीं तराज़ू तोल।   

   

आन जान का खेल है, काहे करे गुमान   

आप मरे तो जग मरा, रहना जाये मसान।   

   

तन लकड़ी सब जल मरे, मरे न अंतस ज्ञान   

तन की चिंता छोड़ कर, कर तू अपना ध्यान ।   

   

जायेंगे सब छोड़ के, जोड़ रखा जो पास   

संग तेरे बस जायेगा, ज्ञान रूपी प्रकाश।   

   

अपना धर्म निभाये जो, मन में 'लता' न आस   

जीवन धन्य हो जायेगा, कर ले यह विश्वास ।   



Rate this content
Log in

More hindi poem from सूक्ष्म महाजन

Similar hindi poem from Inspirational