जलन
जलन
जलन एक विष बेल है, कर देती सब स्वाह
भस्म करे रिश्ते सभी, मन में हो जो डाह।
आज हैं कल रहे नहीं, समय बड़ा अनमोल
बीता समय न लौटता, नहीं तराज़ू तोल।
आन जान का खेल है, काहे करे गुमान
आप मरे तो जग मरा, रहना जाये मसान।
तन लकड़ी सब जल मरे, मरे न अंतस ज्ञान
तन की चिंता छोड़ कर, कर तू अपना ध्यान ।
जायेंगे सब छोड़ के, जोड़ रखा जो पास
संग तेरे बस जायेगा, ज्ञान रूपी प्रकाश।
अपना धर्म निभाये जो, मन में 'लता' न आस
जीवन धन्य हो जायेगा, कर ले यह विश्वास ।
