इश्क़
इश्क़
शिकायत का असर उन पर भी कुछ इस तरह हुआ,
ना मिले कभी वो ना इंतेज़ार उनका हमसे हुआ,
ना जानकर ना पहचान कर इश्क़ भी बड़ा खूब हुआ
इत्मीनान कर लिया दूर से देख कर फिर पास जाने का दिल हि ना हुआ,
रोज रोज के इस मजमे का सफ़र वैसे तो लम्बा चला,
कभी मन में आया पूछ लू, ना भी किया तो क्या हुआ?
बहाने बना कर ताकते रेहने का माजा हि कुछ ओर हुआ,
मिले जब करीब से तो हाल उनका भी बड़ा अजीब हुआ,
इश्क़ ऐसा ही है जनाब जिसको हुआ बड़ा खूब हुआ
जब पूछा तूने हाल मेरा बस तभी मैं बेहाल हुआ,
क्या बताता तुझको के तेरी नज़र का असर हि कमाल हुआ,
ना रात में नींद ना दिन में चैन मिलने को फिर तुझेसे ये दिल हर दिन बेकरार हुआ
दिन बीत गए है जानते नहीं अब एक दूसरे को,
गुजरते है करीब से कभी तो मुस्कुराते भी नहीं,
कम दिनों के लिए ही सही पर इश्क़ जैसा हुआ बड़ा खूब हुआ।

