Raj mevada
Abstract
इस दिखावे की दुनिया में अकेला सा रहता हूं
झाड़ के सारी तकलीफे हवा में कहीं बहता हूँ।
शब्द
संघर्ष
लफ़्ज़
जिंदगी
सफलता
मेरे वक्त में
डायरी में
दिखावे की दुन...
चेहरा
भीतर की भटकन का, जहां खत्म हर अहसास हो। भीतर की भटकन का, जहां खत्म हर अहसास हो।
कोई भी ना साथ देगा दुनिया में मानना तो फिर भी अपना पड़ रहा है। कोई भी ना साथ देगा दुनिया में मानना तो फिर भी अपना पड़ रहा है।
प्रकृति का वर्णन करते यह हाइकू... सुंदर दृश्य स्वच्छ जलधारा- नदी किनारा... प्रकृति का वर्णन करते यह हाइकू... सुंदर दृश्य स्वच्छ जलधारा- नदी किनारा...
इसलिए आज भी वो एलबम मैंने संभालकर रखी है। इसलिए आज भी वो एलबम मैंने संभालकर रखी है।
प्रस्थान तन जब भी करे उत्थान मन का हो अभी। प्रस्थान तन जब भी करे उत्थान मन का हो अभी।
मैं पेड़ हूॅं पर बिखरने लगा हूॅं मैं अब मित्रता के बंधन मानव तू निभाएगा कब? क्यों? क्रूरता पर है ... मैं पेड़ हूॅं पर बिखरने लगा हूॅं मैं अब मित्रता के बंधन मानव तू निभाएगा कब? क...
एक मुस्कुराते मौसम का कर्ज़ एक मुस्कुराते मौसम का कर्ज़
क्यों कर हम खुद पर ही बोलो नहीं नियंत्रण कर पाते? क्यों दूजे के हाथों में हम क्यों कर हम खुद पर ही बोलो नहीं नियंत्रण कर पाते? क्यों दूजे के हाथों में ...
नगर- बाज़ार की रंग से रंग रहे हैं अपनी पहचान खो रहे हैं। नगर- बाज़ार की रंग से रंग रहे हैं अपनी पहचान खो रहे हैं।
वक्त मिलेगा की नहीं कौन जाने ? वक्त मिलेगा की नहीं कौन जाने ?
वो याद आते ही चेहरा हमारा उतर जाता है हंसता खेलता दिल मेरा रोने लग जाता है। वो याद आते ही चेहरा हमारा उतर जाता है हंसता खेलता दिल मेरा रोने लग जाता है।
प्यारी वो तस्वीर जब तब याद बहुत ही आती है प्यारी वो तस्वीर जब तब याद बहुत ही आती है
तो फिर खुद में ही मशगूल रहने दे तू अब मुझे ! तो फिर खुद में ही मशगूल रहने दे तू अब मुझे !
निष्पक्षता के साथ बने, जो देश का आधार, सत्ता का जो दम्भ तोड़ दें, वो है पत्रकार।। निष्पक्षता के साथ बने, जो देश का आधार, सत्ता का जो दम्भ तोड़ दें, वो है पत्रक...
इस जन्म नहीं तो किसी और जन्म में ईश्वर कर दे इच्छा पूरी। इस जन्म नहीं तो किसी और जन्म में ईश्वर कर दे इच्छा पूरी।
अंत में टैक्नोलॉजी हो इस हद तक, इंसान और कुदरत का रहे प्रभुत्व। अंत में टैक्नोलॉजी हो इस हद तक, इंसान और कुदरत का रहे प्रभुत्व।
हम उमुक्त गगन के बंजारे है, पंखों के सहारे नभ में उड़ते है! हमें सीमाओं ने ना रोक सका, स्वक... हम उमुक्त गगन के बंजारे है, पंखों के सहारे नभ में उड़ते है! हमें सीमाओं ने...
खातिर तिरी जो माँ को गोया गवाँ सकता है, वो बाद तेरे औरो को भी फसा सकता है। खातिर तिरी जो माँ को गोया गवाँ सकता है, वो बाद तेरे औरो को भी फसा सकता है।
और उसके प्रत्यावर्तित प्रकाश में नहाए हुये हम उसको पढ़ते हैं। और उसके प्रत्यावर्तित प्रकाश में नहाए हुये हम उसको पढ़ते हैं।
दिल लगाने के नाम से भी अब डर सा लगता हैं ! दिल लगाने के नाम से भी अब डर सा लगता हैं !