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Raj mevada

Abstract

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Raj mevada

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दिखावे की दुनिया

दिखावे की दुनिया

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इस दिखावे की दुनिया में अकेला सा रहता हूं

झाड़ के सारी तकलीफे हवा में कहीं बहता हूँ।


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