अनुरोध श्रीवास्तव
Abstract
नरगिस हैं आँखें, सागर हैं आँखें;
गम में आँसू का गागर हैं आँखें,
दिलों को मिलाती, दिलों में समाती;
खुशी में भी बनती बादल हैं आँखें।
भगतसिंह नें द...
आ गयी होली है
आ गई होली है
इस धरती पर सबकी खातिर, क्या करना और क्या नहीं मुझे है करना। इस धरती पर सबकी खातिर, क्या करना और क्या नहीं मुझे है करना।
सो नतमस्तक होकर के मैं अब सबका तोहे सलाम लिखूं। सो नतमस्तक होकर के मैं अब सबका तोहे सलाम लिखूं।
विविध काल फल मिलते अलग, भले होता कर्म समान, परिवर्तन शाश्वत सत्य है..... विविध काल फल मिलते अलग, भले होता कर्म समान, परिवर्तन शाश्वत सत्य है.....
आप हैं चन्दन यात्रा के मदनमोहन, आप हैं हमारे जगद्गुरु जगन्मोहन, आप हैं इस जगज्जनों के आप हैं चन्दन यात्रा के मदनमोहन, आप हैं हमारे जगद्गुरु जगन्मोहन, आप हैं इस ...
आगे दो दिन की छुट्टी है, परी संग बिता के आता हूँ। आगे दो दिन की छुट्टी है, परी संग बिता के आता हूँ।
माना मैं कर्ण नहीं बन सकती प्रयत्न मेरा यह रहे जो भी मेरे द्वार आए खाली हाथ न जाए माना मैं कर्ण नहीं बन सकती प्रयत्न मेरा यह रहे जो भी मेरे द्वार आए ख...
तू पिता- पुत्र में तू भगिनी-भातृ में तू पति-पत्नी में तू धी-मातृ में तू पिता- पुत्र में तू भगिनी-भातृ में तू पति-पत्नी में तू धी-मातृ में
दूध से पानी के मिलने के बाद तू पानी को क्या इल्ज़ाम देता। दूध से पानी के मिलने के बाद तू पानी को क्या इल्ज़ाम देता।
नहीं ऐसा नहीं है , वो वैसा ही दौड़ रहा है , सिर्फ हम बेहद सहम गए हैं, नहीं ऐसा नहीं है , वो वैसा ही दौड़ रहा है , सिर्फ हम बेहद सहम गए हैं,
दौड़ भाग की ज़िन्दगी से मीलों दूर एक काल्पनिक दुनिया बसाए बैठी थीं। दौड़ भाग की ज़िन्दगी से मीलों दूर एक काल्पनिक दुनिया बसाए बैठी थीं।
सब कुछ भुलाकर खो जाता हूँ मैं, कभी हसीन यादों की परछाई है जिदगी। सब कुछ भुलाकर खो जाता हूँ मैं, कभी हसीन यादों की परछाई है जिदगी।
न तेरा है न मेरा है पानी बस पानी है पानी ही जीवन है जीवन की कहानी है। न तेरा है न मेरा है पानी बस पानी है पानी ही जीवन है जीवन की कहानी है।
कब तुम विपरीत समय में फिर, दुख मेरा बाँट हँसाओगे, कब मेरी सूनी माँग को तुम..... कब तुम विपरीत समय में फिर, दुख मेरा बाँट हँसाओगे, कब मेरी सूनी माँग को तुम...
वक़्त रहते सुधारों अपनी गलतियों को हे इंसान, नहीं तो भगताना पड़ेगा बहुत पड़ा अंजाम। वक़्त रहते सुधारों अपनी गलतियों को हे इंसान, नहीं तो भगताना पड़ेगा बहुत पड़ा...
अच्छा बिजनेस होगा जब कहीं कोई पेड़ पौधा नहीं होगा। अच्छा बिजनेस होगा जब कहीं कोई पेड़ पौधा नहीं होगा।
प्रकृति तुम अतुलनीय हो, शोभनीय हो, प्रकृति तुम अनुपम हो। प्रकृति तुम अतुलनीय हो, शोभनीय हो, प्रकृति तुम अनुपम हो।
शायद समय बहुत आगे बढ़ गया और मैं अब बूढ़ा हो गया। शायद समय बहुत आगे बढ़ गया और मैं अब बूढ़ा हो गया।
है मेरी अभिकामना मैं ज़िन्दगी का सार पा लूँ। है मेरी अभिकामना मैं ज़िन्दगी का सार पा लूँ।
जो देश अपनी उंगलिओं में विश्व को नाचने का काम करते थे अपनी घृणित चालों को चल कर जो देश अपनी उंगलिओं में विश्व को नाचने का काम करते थे अपनी घृणित ...
देना है मरकर खुदा को अपने हिसाब फिज़ूलखर्ची का पानी की फ़िर भी...... देना है मरकर खुदा को अपने हिसाब फिज़ूलखर्ची का पानी की फ़िर भी....