जो ज़बां न कह पाई, आँखों ने बोल दिया। जो ज़बां न कह पाई, आँखों ने बोल दिया।
तभी हम कोरोना को हराकर, हँसी खुशी ये जीवन बीता पायेंगे। तभी हम कोरोना को हराकर, हँसी खुशी ये जीवन बीता पायेंगे।
तभी एक आवाज मेरे कानों में आती है अजी सुनते हो कपड़े धोना भी बाकी है। तभी एक आवाज मेरे कानों में आती है अजी सुनते हो कपड़े धोना भी बाकी है।
यह मिट्टी का मटका भी अमृत कलश बन जाता है। यह मिट्टी का मटका भी अमृत कलश बन जाता है।
बस एक ही पहचान है मेरी कुछ कुछ असर छोड़ जाऊँगी कलम की नोक पर बैठे अल्फाज़ मेरे अपने एहसासों की ... बस एक ही पहचान है मेरी कुछ कुछ असर छोड़ जाऊँगी कलम की नोक पर बैठे अल्फाज़ म...
इस मोम के महल को अब आग तू लगा दे। दुनिया भरी जफा से हमको जफा सिखा दे। इस मोम के महल को अब आग तू लगा दे। दुनिया भरी जफा से हमको जफा सिखा दे।