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हितेश

हितेश

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अँधेरी दीवाली चारों तरफ जगमग रौशनी मानो घर के हर कोने में सितारे विराजमान हों, चमकती हुई दीवारें और साफ़ सुथरा फर्श, जिस पर मन को मोह लेने वाली रंगोली बनी है I ऐसा लगता है जैसे इन्द्रधनुष खिंच कर रंगोली में समां गया हो I हर तरफ दियो की रौशनी और हर कमरे में सुन्दर सुन्दर फानूस और रंग बिरंगे फूलों की मालाओं से सजे दरवाज़े I गुलाबी रंग के मखमली परदे भी बहुत शानदार दिख रहे हैं I कहीं फूलों की महक तो कहीं मिठाइयों और तरह तरह के पकवानों की खुशबू और कहीं पर अगरबत्ती की सुगंध एक दिलकश वातावरण को दर्शा रही थी I घर के बाहर एक सुन्दर सा बग़ीचा जिसमे तरह तरह के पेड़ों पर रंग बिरंगे फूल और छोटे छोटे बल्ब से बनी चादर से ढकी हुई दीवारों से घर दुल्हन जैसा दिख रहा था I ये था सर्वेश अगरवाल का घर I सर्वेश एक कामयाब वकील थे जो अपनी माँ कावेरी, पत्नी प्रीती और एकलौते बेटे हितेश अगरवाल के साथ रहते थे I हितेश बहुत ही चंचल बच्चा था I इसी साल उसका दाखिला शहर के जाने माने स्कूल में करवाया गया था I रोज़ सुबह हितेश नहा धोकर ख़ुशी ख़ुशी स्कूल के लिए तैयार होता और उसकी माँ प्रीती उसका मनपसंद नाश्ता बनाकर एक डब्बे में पैक कर देती I सर्वेश उसे अपनी कार से स्कूल छोड़ने जाता I हितेश रोज़ अपनी टीचर के लिए फूल लेकर जाता था I उसकी टीचर भी उसे बहुत पसंद करती थी I सर्वेश और प्रीती ने अपने एकलौते बेटे के भविष्य के बारे में बहुत सारे सपने देखे थे I वे उसके स्कूल में होने वाली हर मीटिंग में जरूर शामिल होते और उसके परफॉरमेंस के बारे में बात करते I माँ प्रीती ने आज खास तौर पर जलेबियाँ बनाई हैं क्युकी जलेबी उनके चार साल के बेटे हितेश की मनपसंद मिठाई है I एक कोने में आतिशबाज़ी का बहुत सारा सामान रखा है जिसको जलाने के लिए हितेश एक महीने से इंतज़ार कर रहा था I घर के मंदिर में बहुत सारे कपड़े रखे हैं जो हितेश की दादी अम्मा हर साल ग़रीबो में बाँटती हैं I पूरा घर मेहमानों से खचाखच भरा है I लेकिन रौशनी से भरे इस घर में एक माँ बेसुध पड़ी है I उसके मन रुपी मदिर में एक भी दिया नहीं जल रहा I उसे सिर्फ अन्धकार ही अन्धकार दिख रहा है I इतना अन्धकार की उसे अपने चारो ओर कुछ नज़र ही नहीं आ रहा I ऐसा प्रतीत होता है की किसी ने सारी दीवारें काले रंग में सराबोर कर दी हों I प्रीती रो भी नहीं पा रही है I वो केवल अपने दिल के टुकड़े हितेश को पुकार रही है I दो तीन आवाज़े देकर इधर उधर ढूँढती है और फिर बेहोश हो जाती है I एक कोने में हितेश की दादी अम्मा अपनी पथराई आँखों से एक ही ओर टकटकी लगाये देख रही है I सर्वेश अगरवाल हितेश के साथ एम्बुलेंस में जा रहे हैं I हितेश बेहोश हो चुका है I सर्वेश की आँखों में बार बार एक ही मंज़र घूम रहा है जब वो अपने बेटे की चीख सुनकर सीढ़ियों की ओर भागा था I माँ प्रीती अपने बेटे के लिए पूरी बना रही थी और उसे आवाज़ दे रही थी I “हितेश, हितेश बेटा जल्दी से आकर खाना खा लो “ “देखो मैंने तुम्हारे लिए मज़ेदार पूरियां बनाई हैं “ हितेश खेलते खेलते माँ के पास आया और माँ ने उसे पूरी का एक निवाला बना कर खिलाया फिर हितेश भाग कर जाने लगा I माँ फिर से चिल्लाई “ अरे खाना तो खा लो “ लेकिन हितेश नहीं रुका और आवाज़ लगाई “माँ मुझे भूक नहीं लगी है मै बाद में खाऊंगा “ ये कहते ही वो ऊपर के कमरे की ओर भागा I ऊपर के कमरे में किसी ने पानी गर्म करने के लिए रखा था I उस कमरे में ज्यादा कोई जाता नहीं था इसलिए किसी ने सोचा ही नहीं की हितेश वह जा सकता है I आज आखिर हितेश इस कमरे में क्यूँ आ गया ? हितेश अपने पटाखे जलाने के लिए बहुत व्याकुल था I जाने कहाँ से उसे माचिस मिल गई और उसने उसे अपने कपड़ो की जेब में छुपा लिया क्युकी वो जनता था की अगर किसी ने माचिस देख ली तो उसे डांट पड़ेगी I पहली बार माचिस उसके हाथ में आई थी I उसने देखा की एक बाल्टी पानी रखा है और उसमे एक पानी गर्म करने का रॉड पड़ा है I बाल्टी से निकलते हुए धुएं ने उसका ध्यान अपनी ओर खींच लिया I जब वो उसके पास गया तो उसे पानी में उसकी धुंदली सी सूरत नज़र आई I चार साल का मासूम कुछ समझ नहीं पा रहा था I फिर उसने अपनी जेब से माचिस निकाली और उसकी एक तीली निकाल कर सोचने लगा की ये कैसे जल जाती है फिर माँ की नक़ल करते हुए हितेश ने तीली को जोर से रगडा और अचानक से तीली जल पड़ी लेकिन उसके जलने से हितेश इतना घबरा गया गया कि अचानक से उसका पैर फिसल गया और वो उस खौलते हुए पानी की बाल्टी में गिर पड़ा I हितेश की चीख सुनकर सारे घरवाले दौड़ते हुए आये और जल्दी से सर्वेश ने उसे बाल्टी से निकाला और एक मोटे कम्बल में लपेट कर नीचे लाया I जल्दी ही एम्बुलेंस बुलाई गई और सर्वेश हितेश को लेकर अस्पताल की ओर चल पड़ा I आज पहली बार ऐसा हुआ जब सर्वेश को अपने जले हुए हांथो में कोई दर्द नहीं महसूस हो रहा है उसका दिल तो बस हितेश में लगा है I हितेश बुरी तरह जल गया है I वो दर्द से कर्राह रहा है I सर्वेश प्रार्थना कर रहा है की किसी तरह हितेश अस्पताल पहुँच जाये I धीरे धीरे अस्पताल आ ही पहुंचा I डॉक्टर उसे आई सी यू ले गए I डॉक्टर ने बताया वो ८० % जल चुका है वो लोग कोशिश कर रहे हैं लेकिन अब तो भगवान् का चमत्कार ही उसे बचा सकता है I हितेश तीन दिन से आई सी यूं में है I घर में लगातार हवन और पूजा हो रही है I अब डॉक्टर का इंतज़ार है की वो क्या बताते हैं I प्रीती भी तीन दिन से सोई नहीं है I दादी माँ के आंसू भी थमने का नाम नहीं ले रहे I और आखिर आ ही गई वो घडी I डॉक्टर इसी ओर आ रहे हैं शायद वो कोई अच्छी खबर दें I सर्वेश की आँखों में उम्मीद की चमक नज़र आई I सर्वेश: “डॉक्टर साहब मेरा बेटा कैसा है ? वो बच तो जायगा न” “आप पैसो की चिंता बिलकुल न करें मै सब इंतज़ाम कर लूँगा बस आप मेरे बच्चे को बचा लें I एक ही बेटा है मेरा “ डॉक्टर: मै आपकी हालत समझ सकता हूँ लेकिन किसी की जिंदिगी या मौत तो भगवान् के हाथ में होती है I हमने अपनी पूरी कोशिश की लेकिन अफ़सोस हम उसे बचा नहीं सके I वी आर सॉरी “ ये सुनते ही सर्वेश के पैरों के नीचे से ज़मीन निकल पड़ी I आँखों के सामने अँधेरा आ गया और उसके बाद कुछ याद नहीं I कुछ देर बाद जब उसे होश आया तो तो उसने खुद को अपने घर में पाया I बहुत सारे लोगो की भीड़ लगी है और सभी सफ़ेद रंग के कपड़ो में हैं I सर्वेश उठा और सब उसे सांत्वना देने लगे I उसे समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे I वो रोना चाहता था मगर अगर वो खुद रोयेगा तो प्रीती और उसकी माँ को कौन संभालेगा ? इस लिए सर्वेश खून के आंसू पी गया I सामने ज़मीन पर एक नन्ही सी लाश सफ़ेद कपड़े में लिपटी हुई थी I लेकिन सर्वेश को तो उसकी आवाज़े सुनाई दे रही थी I हर कोने से “पापा, पापा” की आवाज़ आ रही थी हर दरवाज़े से हितेश दौड़ता हुआ उसकी ओर आता नज़र आ रहा था I घर की दीवारों पर लगी हितेश की तस्वीरे चीख चीख कर उसे पुकार रही थी I अपनी सारी ताक़त समेट कर सर्वेश उठा और अपने बेटे को अंतिम संस्कार के लिए ले कर चल पड़ा I प्रीती पागलो की तरह उसे रोकने लगी “मत ले जाओ मेरे जिगर के टुकड़े को I उसने कहा है वो आकर पूरी खायेगा I मत ले जाओ मेरे बच्चे को मुझे दे दो I मै उसे प्यार करुँगी I मै उसे खाना खिलाऊँगी I मेरा हितेश .....................मेरा बच्चा” और ये थी उस घर की आखरी दिवाली जिसके बाद दिवालियाँ तो बहुत आई लेकिन रौशनी कभी नहीं हुई I कुल का दिया क्या इस घर से रुखसत हुआ मानो अपने साथ सारे दीयों की रौशनी ले गया I अब दिवाली में मिठाई तो बनती है लेकिन जिंदिगी की मिठास हितेश के साथ कही दूर चली गई I घर में अब सिर्फ तीन शरीर रहते है जिनकी जान इस दिवाली के साथ ऐसी गयी की ज़िन्दिदगी की हर दीवाली को अँधेरा बना गई I

 


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