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देश आदिवासी हम और वो लाश कर्तव्य समझ रक्षक मंजिल कविता सुबह रात हिंदी कविता मिट्टी वहीं ज़मीन सुकून मिलता हैं शाम दुश्मन वो और मैं प्यार वहीं शाम वहीं सुबह दुनिया

Hindi ज़मीन Poems