STORYMIRROR

Nigam Tiwari

Abstract

4  

Nigam Tiwari

Abstract

सर्द रात

सर्द रात

1 min
7

अँधेरे रौशनी से भी घने हैं,

 चाँदनी रातों ने साए पहने हैं।


और इन तारों की सच्चाई बताऊँ?

 उसके गहनों से बिखरकर बने हैं।


मेरे हालत पे तंज कसने वालों, 

तुम्हारे घर में भी तो आईने हैं।


यूं तो फेहरिस्त है शिकायतों की,

 मगर कुछ रात और काटने हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract