सर्द रात
सर्द रात
अँधेरे रौशनी से भी घने हैं,
चाँदनी रातों ने साए पहने हैं।
और इन तारों की सच्चाई बताऊँ?
उसके गहनों से बिखरकर बने हैं।
मेरे हालत पे तंज कसने वालों,
तुम्हारे घर में भी तो आईने हैं।
यूं तो फेहरिस्त है शिकायतों की,
मगर कुछ रात और काटने हैं।
