STORYMIRROR

Zeba Khan

Others Children

3  

Zeba Khan

Others Children

प्रकृति के रुप

प्रकृति के रुप

1 min
307

बाघों में फूलों की महक,

तोते और मैनों की चहक।

दूर तलक फैले हैं खेत,

सहरा की है लम्बी रेत।

आसमां में शीतल चांद,

कहीं ऊंचे ऊंचे हैं बांध।

नदियों के जल की कल कल,

झरनों से बहता अविरल जल।

लहरों का उठता है शोर,

हरियाली फैली चहुं ओर।

जंगलों के हैं झाड़,

ऊंचे ऊंचे हैं पहाड़।

रातों में तारों की चमक,

दिन में होती सूरज की दमक।

आसमां में छाए बादल,

फसलें भी फैलाए आंचल।

प्रकृति का है सुन्दर रूप,

कहीं गहरे बादल कहीं फैली धूप।


Rate this content
Log in