STORYMIRROR

LATA SOLANKI

Abstract

2  

LATA SOLANKI

Abstract

नया समां

नया समां

1 min
133

चलो बांधे कोई नया समाँ हम झूम झूम कर जियें 

अंगूरी छोड़ गैरों के गमों के चँद घूंट भी पिये। 

गरीबों के तूटे फूटे आशियानों के बुझे हैं दीपक

अपने दिल में दिया जलाकर घने घने अंधेरों से जूझें ।

अतड़ियों की आग बुझा कर मीठी तृप्ति की डकार सुने 

फैलाये सुगंध अपनेपन की नेकी और प्रेम की चादरें बुने 

मिशाइल बोंब चक्कू छूरी को गर्म लहू का स्वाद न चखायें 

आओ ब्रम्हांड को मानवता के लाल लाल गुलाल से रंगे। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from LATA SOLANKI

Similar hindi poem from Abstract