STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

मुक्तक : इश्क

मुक्तक : इश्क

1 min
359

जो दावे करते हैं वो मुहब्बत नहीं करते 

जख्मी जिगर का कभी ज़िक्र नहीं करते 


इश्क कोई व्यापार नहीं जो लेन देन करे 

जो लेन देन करते हैं वो इश्क नहीं करते। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance