हाँ मैं एक नारी हूँ....
हाँ मैं एक नारी हूँ....
हाँ मैं एक नारी हूँ पर न समझो बेचारी हूँ।
सहती हूँ बहुत कुछ पर न हिम्मत हारी हूँ।
भरी है ममता की ठंडी सी छांव मुझमे
अपनों पर सदा ही मैं सब कुछ वारी हूँ।
न समझो चुप्पी को मेरी कमज़ोरी तुम ;
शान्ति की खातिर बस यह चुप्पी धारी हूँ।
जब इंतहा हो जुल्म की औ अत्याचारों की;
न समझना अबला हूँ मैं बनी तब संहारी हूँ।
है दयाभाव मुझमे, सहनशक्ति भी है मुझमे ;
गल्त निगाहों से देखोगे तो बनी मैं चिंगारी हूँ।
है संसार और घर बाहर का अस्तित्व मुझसे;
अपनो की रक्षा करूं उनपे मैं बलिहारी हूँ।
जब तुम में दानव जागेगा मेरा अस्तित्व डोलेगा
बन चंडी संहार करूंगी न समझना फुलवारी हूँ।
हाँ मैं नारी हूँ पर न बेचारी हूँ!
