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Yashika Sonkar

Inspirational

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Yashika Sonkar

Inspirational

हाँ मैं एक नारी हूँ....

हाँ मैं एक नारी हूँ....

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हाँ मैं एक नारी हूँ पर न समझो बेचारी हूँ।

सहती हूँ बहुत कुछ पर न हिम्मत हारी हूँ।


भरी है ममता की ठंडी सी छांव मुझमे 

अपनों पर सदा ही मैं सब कुछ वारी हूँ।


न समझो चुप्पी को मेरी कमज़ोरी तुम ;

शान्ति की खातिर बस यह चुप्पी धारी हूँ।


जब इंतहा हो जुल्म की औ अत्याचारों की;

न समझना अबला हूँ मैं बनी तब संहारी हूँ।


है दयाभाव मुझमे, सहनशक्ति भी है मुझमे ;

गल्त निगाहों से देखोगे तो बनी मैं चिंगारी हूँ।


है संसार और घर बाहर का अस्तित्व मुझसे;

अपनो की रक्षा करूं उनपे मैं बलिहारी हूँ।


जब तुम में दानव जागेगा मेरा अस्तित्व डोलेगा

बन चंडी संहार करूंगी न समझना फुलवारी हूँ।


हाँ मैं नारी हूँ पर न बेचारी हूँ!



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