STORYMIRROR

Harshita Mishra

Abstract

4  

Harshita Mishra

Abstract

बाढ़

बाढ़

1 min
526

हमारे शहर में बाढ़ आयी थी,

उस शैलाव में हमारा प्यार बह गया।

कुछ देर बाद जब थमा मंजर तो देखा

केवल हमारा साथ वाला नाम रह गया।


रह गया तो सपनो के घर की नीव,

जिसमें हमारा विश्वास विध्वंस हो गया।

कुछ घर के हिस्सो का मलवा,

जिसमें मेरा वजूद उलझ कर रह गया।


कुछ आधारहीन शिला के अंश,

जो खोखले वचनो की तरह झर्झर हो गया।

जमीन तो वही है,

उन साथ बिताये समय के साथ,

लेकिन तुम्हारा जमीर अब कही मर गया।


रह गये हैं तो उस प्रलय के बाद के

कुछ अवशेष,जिसमें प्रेम सबाल 

और साथ का वचन तेरे

अहम के सामने हार गया।


कुछ छायादार मजबूत

वृक्ष जो दे रहे हैं सहारा,

हमारी कभी न भूलने

वाली यादो की तरह 

जो अभी भी बिखरने के बाद

संभलने का हौसला दे रहा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Harshita Mishra

बाढ़

बाढ़

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract