बाढ़
बाढ़
हमारे शहर में बाढ़ आयी थी,
उस शैलाव में हमारा प्यार बह गया।
कुछ देर बाद जब थमा मंजर तो देखा
केवल हमारा साथ वाला नाम रह गया।
रह गया तो सपनो के घर की नीव,
जिसमें हमारा विश्वास विध्वंस हो गया।
कुछ घर के हिस्सो का मलवा,
जिसमें मेरा वजूद उलझ कर रह गया।
कुछ आधारहीन शिला के अंश,
जो खोखले वचनो की तरह झर्झर हो गया।
जमीन तो वही है,
उन साथ बिताये समय के साथ,
लेकिन तुम्हारा जमीर अब कही मर गया।
रह गये हैं तो उस प्रलय के बाद के
कुछ अवशेष,जिसमें प्रेम सबाल
और साथ का वचन तेरे
अहम के सामने हार गया।
कुछ छायादार मजबूत
वृक्ष जो दे रहे हैं सहारा,
हमारी कभी न भूलने
वाली यादो की तरह
जो अभी भी बिखरने के बाद
संभलने का हौसला दे रहा।
