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मान ली किस युग आंख निहार तारा बनाकर रख ली बेचैन ली हो तुम। ज़िन्दगी "धरती की तो हमने तकसीम कर ली मगर क्या आसमान को भी हम बाँट पाएँगे" स्नेह मेरे बेटे को ले गई जीवन ताल मन दूसरी दुनिया की एलियन पलकें में जन्म तड़प अपनी प्रेम

Hindi ली Poems