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परछाइयां असह्य दर्द सहा असह्य अपमान अच्छी कविता इंसान जीवन परिष्कृत दीजै यह ज्ञान भुलाया निज स्वरूप अरमान सबका वेदना तिरस्कार संशय धूम्र जलते छाले सम्मान इंसानियत अपमान का एक क्षण ज्ञान अटूट भक्ति

Hindi असह्य Poems