यह नारी है, हारी है ना हारेगी
यह नारी है, हारी है ना हारेगी
यह नारी है, हारी है ना हारेगी - -
मत ललकारो इस शक्ति को
मौन की प्रबल अभिव्यक्ति को
अत्याचारी आए तलवार बनो तुम
सदा ही प्यार की धार बनो तुम
घृणा - ईष्या के तोड़ सभी बंधन
स्नेह वीणा की मधुर तार बनो तुम
यह नारी है , हारी है ना हारेगी - - - - ।
उठो, बढ़ो, डरो मत
रुको मत, चलती रहो
अपने लक्ष्य को पहचानो
तुम में छिपी असीमित शक्तियाँ
छिपो नहीं, आत्मबल से जानो
जागो नारी! अब जागो
यह मंत्र कंठस्थ करो तुम ----
यह नारी है,हारी है ना हारेगी - - - - ।
कोमल देह की स्वाभिमानी हो
भावों से भरी हिरणी हो
अस्तित्व की भी खिलाड़ी बनो
हृदय से बहुत ले लिए निर्णय
छला तुम्हें दुनिया ने
अब तो आंखें खोलो
आँसू पोंछो नयनों के
न किसी कन्धे की तलाश करो
स्वयं को संभालो
बोलो अपनी पीड़ा को
स्वयं को प्रेरणा - गीत सुनाओ
यही कहती रहो ----
यह नारी है, हारी है ना हारेगी - - ।
उठो, प्रतिज्ञा लो आज ही
कर्तव्यों का पालन करूंगी
पर स्वयं से न मुख मोड़ूंगी
न स्वयं को और
न किसी और को तोड़ूंगी
एक-दूसरे को आपस में जोड़ूंगी
आशावादी स्वर गूंजें सदा ----
यह नारी है, हारी है ना हारेगी - - ।
