सूरज और चाँद
सूरज और चाँद
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सूरज की तरह तुम
चाँद सी मैं
रहते हैं एक ही गगन में
देख नहीं पाते एक दूजे को
तुम्हारे तेज़ में
तपती हूँ मैं हर पल
तुम भी तो ठिठुरते होंगे
मेरी शीतलता से कभी-कभी....
