जिंदगी एक लिबास
जिंदगी एक लिबास
1 min
458
जिंदगी के लिबास का
अजीब ताना बाना है
रिश्तों की है उसमे गांठें
उम्र की है कुछ सिलवटें
कुछ धागे कच्चे-पक्के है
कई धागे उसमें सुर्ख है
कुछ है धागे स्याह उसमे
कहीं धागें उजले से भी है
रंग गये धागे बंध गये धागे
एक दूसरे में मिल गये धागे
संग संग सिल गये धागे
रंगबिरंगी हो जुड़ गये धागे
कभी उलझकर सुलझे धागे
कही उधड़कर सील गए धागे
कभी पैबंद से जुड़ गए धागे
कही रफू से मिल गए धागे
उलझे धागों की उलझन में
जिंदगी भी रही उलझती सी
लिबास बदला रूह ना बदली
जिंदगी हो गयी अदली-बदली
