चुरा सकते हो तुम शब्द मेरे
चुरा सकते हो तुम शब्द मेरे
चुरा सकते हो तुम शब्द मेरे मगर मुझे कैसे चुराओगे
जिस भावना से लिखा है मैंने वो भावना कहाँ से लाओगे!!
कर लोगे वैसे तो तुम पूरा का पूरा ही कॉपी,
मगर जो आत्मा के साथ लिखा है वो आत्मा कहा से लाओगे!!
नाम भी अपना चढ़ा लोगे, मगर वो अधिकार कहा से लाओगे,
खुद के लिखे हुए पे जो सुकून जो खुशी मिलती है वो कॉपी कर के तुम भला कहाँ से पाओगे!!
चुरा सकते हो तुम शब्द मेरे मगर मुझे कैसे चुराओगे
ये शब्द ही तो है ये ऊपर भी चढ़ते है यही नीचे भी गिरा देते है,
मगर जो भी लिखना तुम वो अपने दम पर ही लिखना,
क्योंकि लिखने वाले कभी चुप नहीं होते
तुम कॉपी कर कर के थक जाओगे वो लिखते लिखते नहीं थकेंगे!!
चुरा सकते हो तुम शब्द मेरे मगर.........
