चन्द्रयान-3 (भारत का दर्पण)
चन्द्रयान-3 (भारत का दर्पण)
शिव शम्भु तेरा डमरू बाजे
चन्द्रयान हमारा गगन में गाजे
रख ली तुमने हिंदुस्तान की लाज
पहना दिया इसे विश्वगुरु का ताज
तपस्वी बन बैठे थे विज्ञानी
न दिन जाना, न रात थी जानी
दिए तूने उनके सपनों को पंख
बजाने लगे स्वयं देवता भी शंख
चाँद पर हमारा बजा है डंका
दुश्मनों की हमने लगा दी लंका
नव भारत अब चलायमान है
यही तो हिन्द की आन-बान है
देख नज़ारा भावुक थी प्रकृति
कैसे आती भला यान में विकृति
असंख्य सपनों का जो भार लिए था
अपार दुआओं का जो अमृत पिए था
ब्रह्माण्ड में लगेगा भारत का नारा
हमारा है चाँद, हमारा है हर तारा
निहार रहे होंगे स्वर्गलोक से कलाम
कह रहे होंगे, माँ! तुझे मेरा सलाम
अद्भुत थी तेरी चाँद पर धमक
फैल गई इंद्रलोक में भी चमक
वात्सल्य से लबालब थी माँ भारती
उतारे स्वयं इंद्र भी तुम्हारी आरती
हिमालय भी आज गौरव से भरा है
प्रफुल्लित आज आर्यव्रत की धरा है
गंगा यमुना आज कर रही है रास
जीवित हो उठी है हर मुरझाई आश
नमन है तुम्हें हे! विज्ञान के वीरों
गर्व है तुम पर, भारत के रणधीरों
शौर्य तुम्हारा यह सदैव बहता रहे
"वन्दे मातरम" हर भारतीय कहता रहे।
