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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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चौपाई छंद - चंदा चोरी

चौपाई छंद - चंदा चोरी

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चौपाई छंद - चंदा चोरी  चंदा   चोरी    करते    रहिए। जितना चाहें  उतना करिए।। नहीं  राम  जी    रोक  रहे हैं। कहाँ किसी को टोक रहे हैं।। भोले   भाले     राम   हमारे। लूटो  तुम  उनके  धन  सारे।। बस गुमराह कभी मत करना। चोरी से निज  झोली भरना।। भक्त आपके हम  सब  प्यारे। सेवा   करते   शाम   सकारे।। मेवा  भी  तो   चखते   रहिए। राम  नाम  जप  झूठा  रटिए।। आखिर भक्त सभी हैं उनके।  चोरी  करते उनका  बनके।। इसमें कुछ अपराध नहीं है। करते तुम जो वही सही है।। व्यर्थ नहीं अब बात बढ़ाओ।  चंदा चोरी का मंत्र  बताओ।। कभी अकेले तुम मत खाना। नाहक  दोगे  क्यों  हर्जाना।। आप  जगत को नहीं सताओ। चंदा  चोरी   राह   बताओ।। राम नाम के गुण सब गाओ। कृपा राम की हर पल पाओ।। सुधीर श्रीवास्तव  


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