STORYMIRROR

Mukesh Tihal

Action Classics Inspirational

4  

Mukesh Tihal

Action Classics Inspirational

अपनी टोली में

अपनी टोली में

2 mins
384

तेरे गाँव की गलियों में आज हमारा आना हुआ

नज़राना तुम्हारा हमको क्यों वीराना बना गया

सिलाना था उन गहरें जख्मों को जो थे तूने दिये

फिर से बिछड़ी यादों के पहरे आंखों को भर गये


किस कद्र तेरा मुस्कराना हमको दीवाना कर गया

क्या खूब सजी थी तेरे घर के लिए वो पगडंडियां

जहां श्वान का चिल्लाना हम पर यूँ ही मस्त छा गया

याद रखूँगा मन को जीत लेने का तराना कैसे है बजा

क़दमों से अपनी टोली में तेरा गाँव हमने नाप है दिया


तेरे गाँव के चौराहे पर है आज बड़ी भीड़ लगी

देखो वहां तेरे कितने मजनुओं की है होड़ जमीं

फिर आने - जाने वालों को वो कैसे ताक है रहे

मंद - मंद मुस्करा हमें ना जाने क्या आँक है रहे


मन का कोतुहल उन्हें ना जाने कितना सता रहा

सवालों के समंदर में हर कोई वहां गोते खा रहा

कोई कहने लगा लगता है ये लुटेरों की फौज है

इनको आज अपने लिये नये मुर्गों की खोज है

अपनी टोली में उत्साह संग बड़ा ओज है सजा


आज तुम्हारे गाँव की लगाई बारी है

कल कहीं ओर हमारी लूट की तैयारी है

हम लूटने तुम्हारे यहां का अंधकार आये

फैलाने ज्ञान का प्रकाश हम दूर तक चले


तेरे गाँव का अब ना एक भी कोई घर बचा

हमनें ज्ञान चक्षु से यहां हर बच्चा परख लिया

तुम लोग भी ठान लेना हमारा कहना मान लेना

अपने बच्चे को अच्छा पढ़ाकर जग में महान बनाना है

अपनी नहीं हम सबकी की टोली का मान बढ़ाना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action