अगर महसूस कर सको तो करो..!
अगर महसूस कर सको तो करो..!
अगर महसूस कर सको तो महसूस करो
इन गहराती काली घटाओ को
इन बरसते मदमस्त बादलों को
उस सोंधी सोंधी मिट्टी की खुशबू को
इन झूमते नाचते भीगे पेड़ों को
अगर महसूस कर सको तो करो।
उन खिलती चटकती रंगीन कलियों को
उन मुस्कराते पेड़ों की हरी टहनियों को
उन पक्षियों के मीठे कलरव को
उन मंडराते भौंरों के मधुर गुंजन को
अगर महसूस कर सको तो करो ।
इस बहती हवा के सरगम को
उन नदियों के पानी के कल कल को
इस सन्नाटे में गहरी खामोशियां को
वो दूर बजती मंदिरों की घंटियों को
अगर महसूस कर सको तो करो।
इस सूरज की पहली किरणों को
उस चांद की श्वेत चांदनी को
उन तारों के बडे़ झुरमुटों को
इस अंधेरे में चमकते जुगनुओं को
अगर महसूस कर सको तो करो।
इन मासूम अदाओं की मुस्कान को
इन नादान बलखाती जुल्फों को
उस गोरी के सुर्ख गुलाबी गालों को
उन पांव में छनकती पायलों को
अगर महसूस कर सको तो करो।
उस माथे पे सजी सुंदर बिंदी को
उन कानों में चमकते बुंदों को
इन हाथों में खनकते कंगनों को
इस दिल में बढ़ी धड़कनों को
अगर महसूस कर सको तो करो।
उस मीरा के निश्छल प्रेम को
इस कन्हैया की अलबेली अठखेलियों को
उस विरह वेदना में घायल विरहनी को
इन नैनों में सजे हसीं ख्वाबों को
अगर महसूस कर सको तो करो।
वो किसी अपने के लंबे इंतजार को
वो इस जिंदगी के हर ठहराव को
वो रोती भीगी भारी पलकों को
वो आने वाले सुनहरे कल को
अगर महसूस कर सको तो करो।
