STORYMIRROR

आसमाँ नीला

आसमाँ नीला

1 min
251


फूलों पे गज़ल लिखा जब

काटें भी शर्मा गये

काटों की तारीफ क्या कर दी

कलियाँ खफ़ा हो गयी


दिल गुनगुनाना चाहता था

नूर निहारा जब उनकी

करीब हुआ तो देखा

भौंरों की हुजूम खड़ा था।


शायद का गुंजाईश कहाँ

दिल से ना पूछो तो अच्छा

दमे का मरीज़ जमाने से है ये

आज भी शहद चाटता।।


दिमाग़ को तो ना पूछोगे

सलाह सही देता वो

आज वो भरमा दे शायद

उसकी कब सुनते हो।।


तितली पकड़ने की कोशिश

बच्चे करें तो अच्छा

तुम्हारी छूअन की छल

वे भी जानतीं ज़नाब।।


आसमाँ को निहारो कभी

धुप्प अंधेरे में नादां

रोशनियों मे तो अक्सर

नीला नीला सा दिखेगा।।



Rate this content
Log in