Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
खूँटी
खूँटी
★★★★★

© Arpan Kumar

Others Inspirational Comedy

1 Minutes   6.7K    7


Content Ranking

एक

मुझे ज़रूरत थी

एक खूँटी की

टाँग सकता था जिस पर

स्वप्न, यौवन, मुखौटा

और दर्द भी अपना

मैंने पार की दीवारें कई

मगर सपाट थी सभी

नहीं मिलनी थी

नहीं मिली कोई खूँटी कहीं।

 

दो 

दिखते हैं एक से

कुछ-कुछ उखड़े हुए 

कवि, राजनेता और अपराधी

और दिख जाती हैं

खूँटियाँ जब तब

उनके चेहरे पर

तो कभी उनके स्वभाव में।

 

तीन

फ़सल पहुँच जाती है

खलिहान में

अनाज चला जाता है

मंडी में

छोड़ दी जाती हैं

या फिर जला दी जाती हैं

यूँ ही खेतों में खूँटियाँ। 

खूँटी Arpan Kumar

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..