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Savita Gupta

Others


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संस्मरण

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रोमांचकारी कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने का सौभाग्य २०१७ में मिला। मैं और मेरे पति दोनों काफ़ी उत्साहित थे, मैं थोड़ी डरी हुई थी। हाई एलटिच्युड में कैसे सँभालूँगी अपने आपको।


८जून से यात्रा आरंभ हुई राँची से लखनऊ , लखनऊ में रात्रि पड़ाव के पश्चात बस से लगभग ४ घंटे का सफ़र गाते बजाते ३० लोगों का हमारा ग्रुप नेपालगंज के होटल में दो दिन रुका। एक दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा क्योंकि आगे की यात्रा छोटे हवाई जहाज़ से सिमीकोट तक जाना था लेकिन मौसम ख़राब होने के कारण हवाई जहाज़ उड़ान नही भर पा रहा था तीसरे दिन मौसम साफ़ हुआ।

समूह ख़ुशी से झुम उठा। हम सब एक घंटे के हवाई सफ़र कर सिमीकोट पहुँच गए ,जो नेपाल में हीपहाड़ों के बीच एक हेलिपैड है। यहां से पाँच पाँच के ग्रुप में हम सभी हेलिकॉप्टर से हिलसा पहुँच गए। हिलसा नेपाल और चीन की सीमा है।


यहाँ से एक पतले जर्जर छोटे लोहे के पुल से पैदल चल कर चीन की सीमा में दाखिल हो गए। यहाँ से बस से हम सब “पुरांग “चीन का एक छोटा सा शहर पहुँच गए।

      रात्रि विश्राम करके दूसरे दिन डॉ की जाँच प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा क्योंकि काफी ऊँचाई के कारण ऑक्सीजन की कमी साफ़ महसूस हो रही थी। खाना तो अच्छा मिल रहा था, पर खाया नहीं जा रहा था। पहाड़ों पर बस एक दवा ‘डाइमॉक्स ‘ऊँचाई पर ऑक्सीजन स्तर को बनाए रखने में कारगर होती है। जिसे खाकर और कपूर सूँघ कर हम सभी किसी तरह चल पा रहे थे।


हमसब, बस से लगभग तीन घंटे के सफ़र तय कर बीच में सुंदर नीले रंग का रावण ताल देखते हुए मानसरोवर पहुँच गए। मानसरोवर में व्यवस्था कामचलाऊ था। शौच के लिए टेंट में व्यवस्था की गई थी। एक -एक कमरे में सात -आठ लोगों को ठहराया गया था। रज़ाई खाने -पीने की व्यवस्था भी थी लेकिन ठंड और ऑक्सीजन की कमी के वजह से कई यात्री बीमार पड़ गए ,उन्हें अपनी आगे की यात्रा रद्द कर वापस जाना पड़ा। मुझे भी वापस भेजा जा रहा था। एक बार मैं बेहोश हो गई थी लेकिन साथ गए डॉ मित्रों के सहायता से मिनटों में होश में आ गई। मुझे उस वक्त लगा था कि यहीं राम नाम सत्य हो जाएगा लेकिन...भोले बाबा की असीम कृपा से आगे की यात्रा कर पाई।

        अगले दिन हम सब बस से मानसरोवर झील पहुँच गए। रास्ते में हमें दूर से साक्षात कैलाश पर्वत का दर्शन होने लगा था। शिव नगरी पहुँच कर हम सब बेहद ख़ुश और उत्साहित थे। मानसरोवर के ठंडे जल में स्नान ,दान ध्यान लगा कर हम धन्य हो गए। सारा कष्ट काफ़ूर हो गया।

      मानसरोवर से हम दारचेन पहुँच गए। यहां हमें रात्रि विश्राम करना था।अगले दिन जिन्हेंप वित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा करना था वो आगे बढ़े बाक़ी लोग वही रुक कर साथियों के लौटने का इंतज़ार किए। मेरे पति पहले दिन की परिक्रमा करने उपर गए।रात में ऊपर बाबा नगरी में रुक कर कैलाश पर्वत को काफी नज़दीक से देखने का सौभाग्य पति को प्राप्त हुआ। सूर्य की प्रथम किरण हिम पर्वत पर जैसे ही पड़ी मानो समूचा कैलाश पर्वत सुनहरा हो गया, जिसे मेरे पति ने अपने कैमरे में क़ैद कर लिया था। ठंड, मौसम ख़राब और रास्ता कठिन होने के कारण दूसरे,तीसरे दिन की परिक्रमा बीच में रोक सभी दारचेन वापस आ गए।

    हम सभी कैलाश मानसरोवर की दुरूह, दुर्गम यात्रा पूरी कर वापस उसी रास्ते से जैसे आए थे वैसे ही दस दिन की सफल यात्रा पूरी कर देवों के देव महादेव के दर्शन कर अभिभूत हुए।


मैं एक अविस्मरणीय और अविश्वसनीय यात्रा का हिस्सा बन आज भी रोमांचित हो जाती हूँ।


           


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