शीर्षक - अस्तित्व
शीर्षक - अस्तित्व
बचपन से तो नहीं कहा जा सकता पर हां जब से मैंने होश संभाला मेरा एक सपना था कि मैं अपनी जिंदगी में अपना खुद का एक अस्तित्व कायम कर सकूं!
लोग मुझे सिर्फ और सिर्फ मेरे नाम से पहचाने क्योंकि एक स्त्री का स्वयं कोई वजूद नहीं होता! वह या तो किसी की मां के नाम से पुकारी जाती है या बेटी के नाम से या बहन के नाम से या बहू या पत्नी।
और आज फेसबुक पर स्टोरी मिरर पर मैं अपनी लेखनी से अपना स्वयं का अस्तित्व और वजूद बनाने में सफल हुई आज लोग मुझे मेरे नाम से जानते है।
