मोती दान
मोती दान
ओ.....हो.....ग्यारह बीस हो गये ।मम्मी जी भी क्या सोच रही होगी ? एक घंटा पहले बोला था बहु को चाय बनाने के लिए लेकिन चाय अभी तक नहीं बनी। इतने सारे काम हैं मैं अकेली जान क्या-२ करूँ? बाथरूम में इतने सारे कपड़े धोने के लिए रखे थे,इतनी जल्दी-२ हाथ चलाया फिर भी चालीस मिनट लग गए। जल्दबाजी में तौलिया भी ले जाना भूल गई मैं मेरे बालों से पानी टपके जा रहा है अब टपकने दो पानी पहले माँ जी के लिए चाय बना लेती हूँ फिर बालों को पोंछ लूँगी । अरे सिंदूर लगा लेती हूँ। मेरी भागदौड़ खत्म होने से रही। बड़बड़ाती हुई रमा रसोईघर की तरफ भागी सिंदूर लगा कर ,तभी सासुु. माँ ने उसे पुकारा -रमा जल्दी नीचे आ ।
रमा नीचे भागती हुई पहुँची- माफ कीजिएगा मम्मी जी मैं अभी चाय बना कर लाती हूँ,इतने सारे कपड़े थे बाथरूम में और मुझे बाल भी धोना था बस अभी चाय बना कर लाती हूँ।
सासु माँ - जरा साँस भी ले लो बहु, मैंने चाय बना ली है और तुम्हारे लिए नाश्ता भी लगा दिया है। आओ बैठ कर नाश्ता करो।
रमा- हे भगवान !मैंने कितने पुण्य किए है,जो इतनी अच्छी सास मिली है मुझे कहते हुए रमा ने सासु माँ को गले लगा लिया।
सासु माँ - तुम सबके लिए इतना कुछ करती हो अगर मैंने तुम्हारे लिए कुछ कर दिया तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। तु भी तो मेरी बेटी जैसी है। अच्छा तु नाश्ता कर मैं धुले कपड़े फैला कर आती हूँ।
रमा - मैंने जरूर मोती दान किए होंगे तभी तो मुझे माँ जैसा प्यार करने वाली सासु माँ मिली है ,ये बोलती हुई रमा ईश्वर को हार्दिक धन्यवाद देती हुई नाश्ता करने लगी।
