माँ का प्यार : Mother's Love
माँ का प्यार : Mother's Love
माँ रसोई में काम कर रही थी। तभी उसका १० वर्ष का बेटा उसके पास आया और बिना कुछ कहे एक काग़ज़ का टुकड़ा आगे बढ़ा दिया। माँ के हाथ गीले थे। पहले उसने अपने हाथ पोंछे, फिर उस काग़ज़ को लेकर पढ़ने लगी। उस पर लिखा था : लॉन की घास काटने के – २० रुपये इस सप्ताह अपना कमरा साफ़ करने के – १० रुपये आपके काम से दुकान जाने के – १० रुपये छोटे भाई का ध्यान रखने के – ५ रुपये कचरा बाहर फेंकने के – ५ रुपये पूरा हिसाब – कुल ५० रुपये। बेटे ने उस सप्ताह जितने काम किये थे। उसका हिसाब उसने उस कागज़ पर लिख दिया था। पूरा हिसाब पढ़ने के बाद माँ ने नज़र उठाकर अपने बेटे को देखा और कुछ सोचने लगी। फिर उसी काग़ज़ को पलटकर पीछे कुछ लिखने बैठ गई। लिखने के बाद उसने वह काग़ज़ अपने बेटे को दे दिया। उस पर लिखा हुआ था : नौ महीने जो मैंने तुम्हें अपनी कोख में रखा, उसकी कीमत – कुछ नहीं। तुम जब छोटे थे और जब-जब भी तुम बीमार पड़े, तब सारी-सारी रात जागकर तुम्हारी सेवा करने की कीमत – कुछ नहीं। वे सारे मुश्किल समय जो तुम्हारे कारण मुझे मिले, उसकी कीमत – कुछ नहीं तुम्हारे खिलौने, कपड़े, किताबें, खाने-पीने की चीज़ें और यहाँ तक कि तुम्हारी नाक साफ़ करने की कीमत – कुछ नहीं।
इन सब में जब तुम मेरा प्यार शामिल करोगे। तो उसकी कीमत तो लगाईं ही नहीं जा सकती। बेटे ने जब अपनी माँ की लिखी हुई बातें पढ़ी, तो उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने अपनी माँ की आँखों में देखा और बोला, “I Love You Mummy” फिर उसने पेन लिया और बड़े अक्षरों में उस कागज़ पर लिखा : “PAID IN FULL”
