कोश
कोश
कहानी की शुरुआत एक छोटे से गांव से होती है सरताजगंज जहाँ रहती है कोश|कोश के पिता उसे बचपन में छोड़कर चले जाते हैं। कोश अपने घर में अपने भाई और माँ के साथ रहती है। उसकी माँ अपने बच्चों का पेट भरने के लिए गाँव के बाहर अपनी ज़मीन पर खेती करती है।कोश की परवरिश उसकी माँ ने बड़े लाड़-प्यार से की थी और कोश भी कभी अपनी माँ को ज़्यादा परेशान नहीं करती थी, क्योंकि वह जानती थी कि उसकी माँ पूरे दिन धूप में काम करने के बाद घर के लिए खाने-पीने का सामान लाती है। वह केवल उनकी ज़रूरतें पूरी कर सकती थी, शौक़ नहीं।कोश अपनी पढ़ाई छोड़कर अपने भाई को पढ़ाने के बारे में अपनी माँ से कहती है, क्योंकि अब या तो कोश पढ़ सकती थी या फिर उसका भाई वेद। इसलिए कोश की पढ़ाई छुड़वा दी जाती है और वह घर पर ही मिट्टी के बर्तन बनाना शुरू कर देती है। अपनी बेटी की लगन देखकर उसकी माँ खुश तो होती है, पर साथ ही यह सोचकर दुखी भी होती है कि पढ़ाई में इतनी होनहार होने के बावजूद उसकी पढ़ाई छुड़वा दी गई।वेद स्कूल जाने लगा और कोश घर पर रहकर सुंदर घड़े और कप बनाती थी। जो कुछ भी बिकता, वह उसे घर के खर्च में दे देती। कोश को इस तरह ज़िम्मेदारी निभाते देखकर गाँव के लोग हैरान हो जाते। कुछ साल बीत जाते हैं, वेद की इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी हो जाती है और कोश का नाम उसके गाँव से लगने वाले चार गाँवों में मशहूर हो जाता है। उसकी कारीगरी से कई लोग प्रभावित थे। जहाँ कोश ने 9 साल की उम्र से ही घर की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी, वहीं अब वह 18 साल की हो चुकी थी। अपनी माँ को इतना सहारा देकर कोश ने अपना पूरा बचपन मौज-मस्ती से ज़्यादा अपनी ज़िम्मेदारियों को दे दिया।कोश के घर की हालत अब बहुत बेहतर हो चुकी थी। गाँव के लोग भी कोश और उसके परिवार की बहुत इज़्ज़त करने लगे थे। कोश के बनाए बर्तनों की वजह से गाँव के लोग उसे “कोश मटके वाली” कहकर बुलाने लगे। वेद अब आगे पढ़ने के लिए शहर जाना चाहता था।वेद का दाख़िला शहर के एक कॉलेज में करा दिया जाता है, लेकिन कॉलेज में बुरी संगति के कारण वेद शराब और जुए का आदी हो जाता है, जिससे वह अपना पूरा साल बर्बाद कर देता है। इसके बाद कोश की माँ उसे शहर में पढ़ने नहीं देती और गाँव के पास के एक कॉलेज में वेद का दाख़िला करा दिया जाता है, ताकि उस पर और उसकी हरकतों पर ध्यान रखा जा सके। धीरे-धीरे उसकी बुरी आदतें छूट जाती हैं।
कोश खुले मन से जीने वाली लड़की थी। वह अपने भाई पर किसी तरह की रोक-टोक नहीं करती थी, लेकिन अब माँ के कड़े स्वभाव के कारण वह कुछ कह भी नहीं पाती थी। वेद मन लगाकर पढ़ाई करता है और अच्छे अंकों से पास हो जाता है।इसके बाद वेद एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी करने लगता है। वहीं वेद की कंपनी में काम करने वाला एक लड़का राहुल, वेद के घर आता है और कोश को पसंद करने लगता है। सौभाग्य से कोश भी राहुल को पसंद करने लगती है। लेकिन छोटे घर से होने के कारण राहुल के घरवाले शादी से इनकार कर देते हैं। फिर भी राहुल अपनी दादी के ज़रिए सबको मना लेता है।कोश और राहुल की शादी हो जाती है। शादी के कुछ ही दिनों बाद कोश की माँ इस दुनिया को छोड़कर चली जाती है। वेद अब घर में अकेला रह जाएगा, यह सोचकर कोश कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली जाती है।
इधर राहुल की दादी अपनी पोती, यानी राहुल की बहन शालिनी के लिए वेद को पसंद कर लेती हैं। इसके बाद वेद की मंज़ूरी से दोनों की शादी हो जाती है। वेद और उसकी पत्नी खुशी से रहने लगते हैं।
उधर राहुल कोश को आगे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिसके बाद कोश एक आईपीएस अधिकारी बन जाती है।☺️☺️
