ज़िंदगी की गहराइयों से जुड़ी एक गीतिका, आशा है आप सबको पसंद आएगी... ज़िंदगी की गहराइयों से जुड़ी एक गीतिका, आशा है आप सबको पसंद आएगी...
न दाग़ कहीं न आग कहीं बाग़ के गुल हैं सहर के बहाव शाम के छाँव कहीं के हूर हैं न दाग़ कहीं न आग कहीं बाग़ के गुल हैं सहर के बहाव शाम के छाँव कहीं के हूर हैं
कभी जब आँख लगती है, माँ की गोद में मेरी! तो मानो रूह मेरी बाग़-ए-जन्नत टहलती है! कभी जब आँख लगती है, माँ की गोद में मेरी! तो मानो रूह मेरी बाग़-ए-जन्नत टहलती है...