न दाग़ कहीं न आग कहीं बाग़ के गुल हैं सहर के बहाव शाम के छाँव कहीं के हूर हैं न दाग़ कहीं न आग कहीं बाग़ के गुल हैं सहर के बहाव शाम के छाँव कहीं के हूर हैं