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आह को परखना सीख लिया है अब कोई गम नहीं माया फूल आदमी मन निर्माण दरिया नज़र हाथ कुंदन रण मोहब्बत बदल सब्र इंसान हर आह पे अब दिल घबराता नहीं आग परेशानी चक्कर

Hindi घबराता Poems