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निर्माण संभल कुंदन मन अब कोई गम नहीं हाथ इतिहास दरिया इंसान आदमी आह को परखना सीख लिया है पड़ाव नफरत फूल चक्कर बदल हर आह पे अब दिल घबराता नहीं रण काया जीवन

Hindi घबराता Poems