STORYMIRROR

मन पड़ाव हाथ आग दौर दरिया हर आह पे अब दिल घबराता नहीं आह को परखना सीख लिया है रण बदल परेशानी काया अब कोई गम नहीं निर्माण सब्र नज़र चक्कर आदमी कुंदन हिंदी कविता

Hindi घबराता Poems