यादें
यादें
वह बचपन की यादें,
दोस्तों की बातें।
कभी साथ चलना,
वह पल पल मचलना।
बोरे के पीछे चोरी से दुबकना।
दोस्तों संग गप्पें,
वह हसीन रातें।
वह बचपन बहुत याद आता है,
जो हंसी पल को तड़पा जाते हैं।
वह बारिश की बोली,
वो फूलों पे तितली,
दोस्तों संग ठिठोली,
वह आधी रात होली,
बहुत याद आते हैं।
दिल को तड़पा जाते हैं,
वह दोस्तों से बातें।
उनसे हंसी मुलाकातें,
वह चिट्ठी की रात,
वह राज की बात।
और बहके जज़्बात,
पप्पा संग आंख मिचोली,
और नानी की लोरी।
वह बचपन की लोहड़ी,
बहुत याद आते हैं।
जाने दिल को तड़पा जाते हैं,
वह स्कूल बंक करना,
फिर हुड़दंग करना ,
फिर शरारत करके,
मुर्गा बन जाना।
उनसे हसीन मुलाकात,
और चुपके से चोरी से बात।
वह शक्तिमान बनना,
दुश्मनों से लड़ना।
पप्पा के जेब से, अठन्नी चुराना।
फिर मम्मी की गोद में,
चोरी से छुप जाना।
वह हंसी पल याद आते हैं,
ना जाने क्यों दिल को तड़पा
जाते हैं।
खेल वो बचपन का,
हंसी पल आंगन का।
वह बरगद का झूला,
वह पुराना कुआं,
ममता का आंचल।
अम्मा संग वो पल,
हंसी पल में खेतों का,
गेहूं के मैदानों का।
वह कच्ची पगडंडी पे,
गिर के फिसलना।
फिर घर आकर,
बब्बा से डांट सुनना।
मटके की लस्सी,
मक्के की पोटली।
वह बचपन के दिन याद
आते है ना जाने
दिल को तड़पाते है
