वह पहली खुशी
वह पहली खुशी
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धुन केवल काम से मतलब
नहीं चाह कोई और
नींव से पत्थर बने चाहा
साँझ और भोर
तभी अचानक एक दिन
आया सम्मान-ए-पैगाम
आँखों फिर हुआ यकीन न
लिस्ट में देख के नाम
वापस उनको फोन मिलाया
सच ही है या सपना
कर्म के फल को देख
साकार खुशी हुआ मन अपना
अंकित मन पटल पर वह
स्मृति भूले नहीं भुलाये
पहला प्यारा पैगाम
कहो कोई भूल भी पाए।
