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धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"

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धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"

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ऋतुओं का राजा

ऋतुओं का राजा

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बसंती रंग में डूबे सभी इंसान मिलते हैं!

यहीं पर राम मिलते हैं यहां रहमान मिलते हैं!!


मिटा के वैर-नफ़रत को खत्म करते सभी दूरी! 

उजाला प्रेम का फैले यकीं-ईमान मिलते हैं!!


सुरीले गीत सब गाते दया-सम्मान से भरकर!

मिले हर आत्मा निर्मल धवल परिधान मिलते हैं!!


नज़ारा दिलनशीं लगता बड़ा खुशियों भरा यारों!

सितारे चंद्र भी इस दिन ज़मीं पर आन मिलते हैं!!


ख़ुशी में झूमती फ़सलें हवा भी रागिनी गाए!

उन्हें ऋतुओं के राजा से हसीं फ़रमान मिलते हैं!!


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